जिले में चल रहे सेविका- सहायिका ओं की बहाली मैं पेंच   फसाने की साजिश शुरू।

 बेतिया (पश्चिम चंपारण) बिहार 

इन दिनों शहरी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक आंगनबाड़ी केंद्रों में सेविका व सहायिकाओं की बहाली का कार्यक्रम बड़ी तेजी से चल रहा है ,इस कार्यक्रम के अंतर्गत आम सभा के माध्यम से सेविका- सहायिका की बहाली का कार्य में कई प्रकार की पेंच फंसने की संभावना बन रही है। इसी क्रम में संवाददाता को पता चला है कि किसी- किसी आम सभा में जाति की बहुलता के आधार पर आंगनबाड़ी सेविका- सहायिका की बहाली करने की मांग ग्रामीणों ने उठाई है, मुख्य द्वारा अनुशंसित आवेदनों में ग्रामीणों ने बताया है कि पिछड़ा वर्ग जाति की बहुलता है ,इसके बावजूद कतिपय लोग किसी दूसरे जाति की बहाली कराने को बाधा उत्पन्न कर रहे हैं, यह घटना लगभग सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर होने वाले आम सभाओं में सुनने को मिल रही है, यही कारण है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर होने वाले सेविकाओं -सहायिकाओं की बहाली में आपस में लोगों का मारपीट ,गाली-गलौज ,सरकारी कागजों को फाड़ना इत्यादि अनेक प्रकार के घटनाएं घट रही हैं, कहीं-कहीं तो जाति विशेष बाहुल्य क्षेत्र में भी दूसरे जाति के लोगों का हस्तक्षेप करना और इस आमसभा में अपना अड़ंगा लगाना ताके आमसभा रद्द हो जाए और अपने मन के मुताबिक अभयार्थी  के जबरदस्ती करके सूची में नाम अंकित करा सकें मगर पर्यवेक्षिका ओं की उपस्थिति एवं मुख्यया एवं वार्ड सदस्यों की उपस्थिति में आंगनबाड़ी केंद्रों पर होने वाली सेविका व सहायिकाओं की बहाली का काम किसी किसी स्थान पर बड़ी आसानी से हो जा रहा है मगर किसी किसी स्थान पर पेंच फंसने की संभावना से आम सभा को रद्द कर दिया जा रहा है, अगर आम सभा मैं होने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविका एवं सहायिकाओं की बहाली में जिला प्रशासन से किसी मजिस्ट्रेट की नियुक्ति होती तो इस तरह की घटनाएं घटने की संभावना नहीं रहती और आसानी से आंगनबाड़ी केंद्रों पर होने वाली सेविका व सहायिकाओं की बहाली का रास्ता बिल्कुल साफ हो जाता, मगर प्रशासनिक ढील के कारण इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं जो न्याय उचित नहीं है।

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