सुहाग के दिर्घायु होने की कामना के साथ महिलाओं ने मनाया तीज
पति के दीर्घायु होने की मंगल कामना के साथ सुहागिनों ने तीज व्रत मनाया.
हरितालिका तीज: सुहाग की रक्षा को रखा व्रत
संवाददाता--मो०शमशाद आलम
करगहर-- अखंड सौभाग्य के लिए विवाहिता महिलाओं ने सोमवार को हरितालिका तीज का व्रत रखी। नई चूड़ियां और नई साड़ी धारण कर पूरे दिन निर्जला व्रत रख कर महिलाओं ने विधिवत पूजन अर्चन किया। साथ ही पर्व की परंपरा के मुताबिक सुहाग की रक्षा के लिए प्रचलित पौराणिक कहानियां भी सुनीं।इस पर्व की परंपराएं भी करवाचौथ जैसे व्रत पर्व से काफी हद तक समान हैं। सोमवार को पर्व की परंपराओं के मुताबिक सुहागिनों ने स्नान करने के बाद बांस या मिट्टी के बर्तन में रख कर फल और वस्त्र भी दान किया। साथ ही सुहाग के जोड़े में सज कर पूजन - अर्चन किया। इस मौके पर महिलाओं ने मंदिरों में सामूहिक रूप से शिव-पार्वती और गणेश की पूजा विधिविधान से की। इस पूजा में उन्होंने पुष्प,धूप और नैवेद्य भी चढ़ाए। इस मौके पर मां पार्वती की प्रतिमा का सुहागिन के रूप में श्रृंगार भी किया गया। पूजा करने वाली महिलाओं ने बताया कि मां पार्वती और भगवान शंकर निश्चित रूप से अखंड सौभाग्य की कामना पूरी करते हैं। पर्व को मनाने को लेकर मान्यता है कि इस व्रत को सर्वप्रथम मां पार्वती ने प्रभु शिव के लिए किया था। इसीलिए व्रत रखने वाली महिलाएं इस मौके पर भगवान शिव और मां पार्वती की कथा जरूर सुनती हैं। चूंकि मां पार्वती ने भादों महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया को यह व्रत किया था। इसीलिए शुक्ल पक्ष की तृतीया को ही यह पर्व मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि कई स्थानों पर कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति की कामना से तीज का व्रत रखती हैं।
पंडित विमलेश मिश्र कहते है कि धार्मिक ग्रथों के मुताबिक.इस पर्व की परंपरा त्रेतायुग से है।इस पर्व के दिन जो सुहागिन स्त्री अपने अखंड सौभाग्य और पति और पुत्र के कल्याण के लिए निर्जला व्रत रखती है ,उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है ।वे बताते है कि धार्मिक मान्यता है कि पार्वती की तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने तीज के ही दिन पार्वती को अपनी पत्नी स्वीकार किया था।इस कारण सुहागन स्त्रियों के साथ साथ कई क्षेत्रों में कुंवारी लड़कियों भी यह पर्व करती है।
पति के दीर्घायु होने की मंगल कामना के साथ सुहागिनों ने तीज व्रत मनाया.
हरितालिका तीज: सुहाग की रक्षा को रखा व्रत
संवाददाता--मो०शमशाद आलम
करगहर-- अखंड सौभाग्य के लिए विवाहिता महिलाओं ने सोमवार को हरितालिका तीज का व्रत रखी। नई चूड़ियां और नई साड़ी धारण कर पूरे दिन निर्जला व्रत रख कर महिलाओं ने विधिवत पूजन अर्चन किया। साथ ही पर्व की परंपरा के मुताबिक सुहाग की रक्षा के लिए प्रचलित पौराणिक कहानियां भी सुनीं।इस पर्व की परंपराएं भी करवाचौथ जैसे व्रत पर्व से काफी हद तक समान हैं। सोमवार को पर्व की परंपराओं के मुताबिक सुहागिनों ने स्नान करने के बाद बांस या मिट्टी के बर्तन में रख कर फल और वस्त्र भी दान किया। साथ ही सुहाग के जोड़े में सज कर पूजन - अर्चन किया। इस मौके पर महिलाओं ने मंदिरों में सामूहिक रूप से शिव-पार्वती और गणेश की पूजा विधिविधान से की। इस पूजा में उन्होंने पुष्प,धूप और नैवेद्य भी चढ़ाए। इस मौके पर मां पार्वती की प्रतिमा का सुहागिन के रूप में श्रृंगार भी किया गया। पूजा करने वाली महिलाओं ने बताया कि मां पार्वती और भगवान शंकर निश्चित रूप से अखंड सौभाग्य की कामना पूरी करते हैं। पर्व को मनाने को लेकर मान्यता है कि इस व्रत को सर्वप्रथम मां पार्वती ने प्रभु शिव के लिए किया था। इसीलिए व्रत रखने वाली महिलाएं इस मौके पर भगवान शिव और मां पार्वती की कथा जरूर सुनती हैं। चूंकि मां पार्वती ने भादों महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया को यह व्रत किया था। इसीलिए शुक्ल पक्ष की तृतीया को ही यह पर्व मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि कई स्थानों पर कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति की कामना से तीज का व्रत रखती हैं।
पंडित विमलेश मिश्र कहते है कि धार्मिक ग्रथों के मुताबिक.इस पर्व की परंपरा त्रेतायुग से है।इस पर्व के दिन जो सुहागिन स्त्री अपने अखंड सौभाग्य और पति और पुत्र के कल्याण के लिए निर्जला व्रत रखती है ,उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है ।वे बताते है कि धार्मिक मान्यता है कि पार्वती की तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने तीज के ही दिन पार्वती को अपनी पत्नी स्वीकार किया था।इस कारण सुहागन स्त्रियों के साथ साथ कई क्षेत्रों में कुंवारी लड़कियों भी यह पर्व करती है।


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