गरीबी उन्मूलन अभियान पर कार्यक्रम में हुआ चर्चा:-सुरैया शहाब।

 बेतिया ( पश्चिम चंपारण) बिहार।

शहाबुद्दीन अहमद की रिपोर्ट।

गरीबी उन्मूलन अभियान के अंतर्गत कार्यक्रम के आयोजन में चर्चा करते हुए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ (भारत )की जिला अध्यक्ष ,सुरैया साहब ने उपस्थित लोगों से अपील की कि इस अभियान को जन जन तक पहुंचाने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा तभी जमीनी स्तर तक के लोगों को इससे निजात मिल सकेगी।
उन्होंने आगे कहा के भारत कृषि प्रधान देश है यहां की अधिसंख्य जनसंख्या कृषि पर निर्भर है ,देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी गरीबी में जीवन यापन कर रहा है फिर भी राजनीतिज्ञों के एक बड़े वर्ग का कहना है कि भारत में 10 सालों के दौरान 27 करोड़ लोगों को गरीबी के अभिशाप से मुक्त कर दिया गया है ,जब इसकी पड़ताल की जाती है तो यह कहां तक सच ह,हर साल बड़ी संख्या में होने वाली अकाल मौतों पर गौर करें तो मरने वालों में गरीबों की संख्या अधिक होती ह, गरीबी उन्मूलन का नारा देने वाले यह अक्सर भूल जाते हैं कि आज भी भारत की 36 करोड़ आबादी स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है अगर गरीबों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाई जाएं तो पंक्ति के अंतिम व्यक्ति को उन सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा यह देखना होगा कि सिर्फ योजनाओं को बना देने और कागजों पर उसे शुरुआत  संचालित कर देने से गरीबों का उन्मूलन कभी संभव नहीं है, बल्कि सरकारों को यह ध्यान देना होगा कि जो योजना गरीबों के लिए बनाई जाती है वह उन तक सही रूप से पहुंचाया जा सके और इसका लाभ जमीनी स्तर के गरीबों को मिल सके, केवल सरकारी कार्यक्रम करके और राशि का दुरुपयोग करके गरीबी उन्मूलन का सफाया नहीं किया जा सकता ह,इस पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ की जिला इकाई के अध्यक्ष सुरैया साहब ने सभी लोगों से अपील की आप सभी अपने अपने स्तर से गरीबी उन्मूलन में कार्यक्रमों के माध्यम से इस पर विचार करें और इसको दूर करने के लिए सरकार को अपनी आकांक्षाओं से और अपनी दिशा निर्देश से अवगत कराने का कष्ट करें ताकि सरकार को भी इस संबंध में आगे कार्यवाही करने हेतु मार्ग प्रशस्त हो सके।
अंत में इन्होंने सभी उपस्थित लोगों से आगरह करते हुए यह कहा के गरीबी एक हमारे समाज के लिए एक अभिशाप है जब तक इसको दूर नहीं किया जाएगा तब तक समाज में समानता नहीं आएगी और यही वजह है कि विषमता का माहौल गरम हो रहा है इससे बचने की पूरी पूरी कोशिश करनी होगी ताकि आने वाले दिनों में गरीबों को उनके समतामूलक अधिकार की रक्षा की जा सके।

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