कर्तव्य परायणता और व्यक्तित्व के धनी हैं प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक।
        प्रधानाध्यापक              

 संजय कुमार पांडे संवाद सूत्र बाल्मीकि नगर 


बाल्मीकि नगर थाना क्षेत्र में यूं तो बहुत सारे व्यक्तित्व अपने जीवन की पराकाष्ठा पर इमारत बनाने में मशहूर हो चुके हैं लेकिन व्यक्ति और व्यक्तित्व की झलक किसी के अंदर दिखाई पड़ना एक अलग पहचान होती है। उन्हीं में से एक अपना अलग व्यक्तित्व लिए हुए छोटे-छोटे बच्चों के पठन-पाठन में ताउम्र जीवन व्यतीत करने वाले कर्तव्य परायणता और व्यक्तित्व के धनी हैं रामनाथ राम। बताते चलें कि यह व्यक्तित्व बाल्मीकि नगर थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर रमपुरवा पंचायत में एक प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक के पद पर वर्षों से आसीन हैं। इनकी पहचान इनकी वाकपटुता एवं मितभाषी रस की घोल है। बाल्मीकि नगर में स्थित अतिरिक्त प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र के पास रहने वाले यह व्यक्ति अपनी कर्तव्यनिष्ठा एवं सहिष्णुता की एक अलग पहचान बने हुए हैं। कभी कहते हैं कि हमारा कर्म ही हमारी प्रगति का प्रशस्त मार्ग है जिसके ऊपर मैं बरसों से चल रहा हूं। अपने सहायकों से मेल मिलाप एवं मितभाषी बच्चन का उपयोग करने वाले प्रधानाध्यापक रामनाथ राम की कुछ अलग ही पहचान है। यूं तो बाल्मीकि नगर क्षेत्र में बहुत सारे शिक्षक बंधुओं एवं सम्माननीय गुरुजनों से संपर्क हमेशा बना रहता है लेकिन इनके साथ जो बात करने एवं इनकी व्यक्तित्व का आनंद लेने में जो मजा आता है शायद ही किसी के अंदर यह गुण हो। बातों में लचीलापन होठों पर मुस्कान और मजाकिया लव से इनकी अलग व्यक्तित्व की पहचान बनाती है। बातों बातों में किससे कहावत के साथ-साथ अपने सहायकों की पहली पसंद बन जाते हैं।
अपने कर्तव्य के प्रति यह व्यक्तित्व अपनी व्यक्ति की अनुभूति को और जागृत करती रहती है। यह अपने कर्तव्य पर बने रहने के साथ-साथ अपने ऊपर जिम्मेदारियों को भी भली-भांति पहचानते हैं जिसके चलते यह कुछ अलग ही अपनी भूमिका को निभाते हुए देखे जाते हैं। कुल मिलाकर निष्ठावान व्यक्ति और गुणवान व्यक्ति की पहचान इन के अंदर देखने को मिलता है। प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत प्रधानाध्यापक की पद की शोभा एवं गरिमा को बनाए रखना कोई सीखे तो गुरु रामनाथ राम से। इनके अंदर अहंकार नाम की कोई चीज दिखाई नहीं पड़ती है जिसके चलते इनकी छवि कुछ अलग ही है। कुल मिलाकर कर्तव्य परायणता एवं निष्ठावान व्यक्ति होने की पहचान इन के अंदर कूट-कूट कर भरी हुई है जिसके चलते
अपने सहायकों में भी यह बहुत ही अलग किस्म के इंसान के रूप में अपने आप को खड़ा किए हुए हैं। इनके अंदर एक दूसरे के प्रति सहयोग की भावना भी इनकी व्यक्तित्व को और निखार थी और तरसती है जो हर एक इंसान में होना चाहिए। इसलिए प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक रामनाथ राम कर्तव्य परायणता और व्यक्तित्व के धनी कहे जाते हैं।

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