जहरीले टेमा के बहाव से हजारों किसानों की धान की फसल जलकर खाक

चीनी मिल पदाधिकारियों ने झाड़ा अपना पल्ला
·        किसान कर रहें अपने मुआवजे की माँग, कौन देगा मुआवजा

·        एसडीएम ने कहा कृषि पदाधिकारी को भेज करवाई जाएगी जाँच

R CITY NEWS
नरकटियागंज/अश्वनि सिंह की रिपोर्ट अनुमंडल अंतर्गत हजारों किसानों की उम्मीदों पर पानी उस समय फिर गया, एक तरफ बाढ़ की मार झेल रहें थे, तभी बाढ़ आने का फायदा उठाकर चीनी मिल का जहरीला टेमा मनियारी नदी के सहारे बहा दिया गया कामता फार्म में स्टोर किये जा रहें पोखरे को खोल बहाकर किया गया. मामला कुछ यूं है कि चीनी मिल नरकटियागंज द्रारा बहाए गए टेमा से हजारों किसानों के खेत के धान की फसल जलकर राख हो गई, जड़े सड़ गई. यहाँ तक की किसानों की2 महीने की मेहनत भी बर्बाद हो गई. बता दें कि चीनी मिल के कामता फार्म से जो पोखरा में जमा किए गए चीनी मिल के जहरीले टेमा को मनियारी नदी में आई बाढ़ के साथ बहा दिया जिससे नदियों के किनारे बसे लगभग 4 से 5 गांवों में यह पानी जहाँ जहाँ घुसा खेतों की फसलों को बर्बाद करता गया. किसान अपना रोना रो रहे थे लेकिन किसी विभागीय पदाधिकारी द्रारा इसकी जाँच नहीं की गई. यहाँ तक की चीनी मिल प्रबंधन ने भी इसकी सुधि लेना उचित नहीं समझा. यहाँ इससे परे चीनी मिल प्रबंधन इस समस्या को लेकर अपना पल्ला झाड़ते दिखा.  एक तरफ किसान अपना दर्द बयां कर रहे थे और चीनी मिल अपनी सफाई दे रहा था. किसानों का कहना है कि एक तरफ तो चीनी मिल गन्ने की पेराई को लेकर महीनों तक भुगतान के लिए दौड़ाता रहता है, लेकिन दूसरी तरफ हमारे धान की फसलों को भी नहीं छोड़ा. हम पूरी तरह से बर्बाद हो गए, हमारे खाने के लाले पड़ गए हैं हमारे बच्चों का पालन पोषण कैसे होगा. इसका कोई ठिकाना नहीं है. हमारी दो महीनों की मेहनत कुछ बाढ़ ने बर्बाद किया, बाकि रही कसर चीनी मिल द्रारा छोड़े गए टेमा ने पूरी कर दी. वहीँ जब इसका पक्ष जानने के लिए चीनी मिल मैनेजर आशीष खन्ना को फोन किया गया तो उन्होंने कहा कि किसान गलतफहमी के शिकार हैं, किसानों की वजह से तो चीनी मिल गन्ने की पेराई करता है तो हम उनकी फसलों को क्यों बर्बाद करना चाहेंगे. लेकिन वस्तुस्थिति कुछ और ही बयाँ कर रही है, समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इधर इस बाबत अनुमंडल पदाधिकारी नरकटियागंज से दूरभाष पर बात हुई उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की इस समस्या को जल्द ही कृषि पदाधिकारी द्रारा इसकी जाँच करवाई जाएगी. अगर इसमें मिल प्रबंधन दोषी होगा तो इसके विरुद्ध अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी  और किसानों का उनका मुआवजा दिलाया जाएगा. जहाँ किसानों की हजारों एकड़ जमीन में लगी धान की फसल जिनकी कीमत करोड़ो रुपए आंकी गई है. इस भुगतान कौन करेगी तानाशाही अवध शुगर मिल या सूबे की सरकार, इसका जवाब कौन देगा, एक तरफ तो बाढ़ की मार झेल रहे थे. किसान दूसरी तरफ चीनी मिल टेमा ने किया फसलों को पहुँचाई हानि. वहीँ चीनी मिल द्रारा बाढ़ के पानी में प्रवाहित किए जाने वाले टेमा से प्रभावित गांव में मुख्य रूप से सतवरिया, बरवा बरौली, पोखरिया, मंगरहरी सहित अन्य आस-पास के गांव भी शामिल है. इन गांव के किसान अपने दिल पर पत्थर रख चीनी मिल को कोस रहे हैं, लेकिन इनके सुनने वाला कोई नहीं. वहीँ टेमा के बदबू से अगल बगल के लोग परेशान है, जहरीली जीव जंतु मर जाते हैं जो आप को साफ साफ दिख रहा है. वहीँ किसानों का कहना है कि अब हम धान का बीज कहां से लायें, अब तो इस बरस हमारे खेत परती रहेंगें, यही कहकर अपने आप को सांत्वना देते नजर आये.

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