बाघ के आक्रमण से, मारा गया हिरण प्रजाति का सांभर
बाघ के आक्रमण से, मारा गया हिरण प्रजाति का सांभर
पूरे जंगल में दहाड़ता रहा सांभर लहूलुहान की स्थिति में कालोनियों में घुसा
संजय कुमार पांडे/ संवाद सूत्र बाल्मीकि नगर
वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना बाल्मीकि नगर वन प्रमंडल 2K जंगल में आजकल बरसात के समय बाघों का आतंक सर चढ़कर बोलने लगा है। इसी का एक जीता जागता उदाहरण बुधवार की रात लगभग 9:00 बजे बाघ के आक्रमण से जंगल का श्रृंगार कहा जाने वाला हिरण प्रजाति का सांभर बाघ के आक्रमण से लहूलुहान होकर अपना दम तोड़ दिया। भरसक में सांभर ने अपनी गति एवं चतुराई से बाग से अपना जान बचाकर जटाशंकर रोड नाका पर भाग कर आया और भारतीय स्टेट बैंक के पीछे वाले जंगल में घुस गया तत्पश्चात आसपास बसे कालोनियों में अपनी जान बचाने के लिए लंगड़ा आते हुए घुस गया। बताते चलें कि कालोनियों में बसे लोगों ने सांभर के दर्द को अपनी आंखों से देखा और उसे नजदीक के जंगलों में घुसते हुए भी देखा अगर समय पर विभाग के द्वारा सांभर का इलाज कराया जाता तो वह बच सकता था क्योंकि सांभर बाघ के चंगुल से बच चुका था और उससे दूर भी निकल चुका था लेकिन विभाग की चुप्पी एवं अनदेखी के कारण पूरी रात कालोनियों के बीच झटपट आता हुआ वह सुंदर जीव अपना प्राण त्याग दिया। इस बाबत पूछे जाने पर वन क्षेत्र पदाधिकारी महेश प्रसाद ने बताया कि बरसात के समय में जंगली जानवरों का आतंक काफी बढ़ जाता है खासकर वे कालोनियों के इर्द-गिर्द ए अपना डेरा डाले रहते हैं इसी दौरान बाघ ने अपनी भूख शांत करने के लिए सांभर पर आक्रमण कर दिया था। उन्होंने बताया कि यह सांभर प्रजाति का जीव है जिसकी रूपरेखा बिल्कुल हिरण से मिलता जुलता है। विभाग के जांच उपरांत यह पता चला कि सांभर नर था और वह लगभग 8 से लेकर 10 साल तक की उम्र का था जिसका शरीर देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा था। वन क्षेत्र पदाधिकारी से पूछे जाने पर कि इसके मृत शरीर को क्या किया जाएगा के जवाब में उन्होंने बताया कि अब इस को गढ़ा खून कर हिला दिया जाएगा क्योंकि इसके लिए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया नहीं है क्योंकि यह प्रत्यक्ष है कि यह जीव बाग के आक्रमण से मारा गया है। बताते चलें कि बाघ ने सांभर के पीछे से आक्रमण कर उस के पिछले हिस्से का दाया पैर बिल्कुल तोड़ दिया था और पिछला ही सा निचोड़ दिया था फिर भी वह अपना जान बचाकर एसबीआई बैंक के पीछे वाले कॉलोनी के जंगल में आकर पूरी रात झटपट आने के बाद अपना दम तोड़ दिया जिससे पूरे कालोनियों सहित विभाग में हड़कंप मच गई। सुबह होने के साथ ही वन कर्मियों सहित वन क्षेत्र पदाधिकारी वनपाल घटनास्थल पर पहुंचकर मीडिया वालों से रूबरू हुए और इसकी जानकारी दी।
कॉलोनी वालों की मानें तो आजकल रात के समय में कालोनियों में भी बाघों का आना-जाना शुरू हो गया है जिसके चलते कालोनियों में रहने वाले लोग रतजगा करने पर विवश हो गए हैं। पूरी रात लोग कालोनियों में आग जलाकर रखते हैं ताकि बाघ के आने की कुछ सूचना उन्हें मिल सके। इसके बारे में जानकारी देते हुए वन क्षेत्र पदाधिकारी महेश प्रसाद ने बताया कि जंगली क्षेत्र होने के कारण जंगल के इर्द-गिर्द बसे हुए कालोनियों में प्रायः जंगली जानवर आ जाया करते हैं इसलिए लोगों से अपील है कि वे अपनी सुरक्षा स्वयं करें क्योंकि बरसात का समय है जीव जंतु कालोनियों की ओर रुख करेंगे ही।
पूरे जंगल में दहाड़ता रहा सांभर लहूलुहान की स्थिति में कालोनियों में घुसा
संजय कुमार पांडे/ संवाद सूत्र बाल्मीकि नगर
वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना बाल्मीकि नगर वन प्रमंडल 2K जंगल में आजकल बरसात के समय बाघों का आतंक सर चढ़कर बोलने लगा है। इसी का एक जीता जागता उदाहरण बुधवार की रात लगभग 9:00 बजे बाघ के आक्रमण से जंगल का श्रृंगार कहा जाने वाला हिरण प्रजाति का सांभर बाघ के आक्रमण से लहूलुहान होकर अपना दम तोड़ दिया। भरसक में सांभर ने अपनी गति एवं चतुराई से बाग से अपना जान बचाकर जटाशंकर रोड नाका पर भाग कर आया और भारतीय स्टेट बैंक के पीछे वाले जंगल में घुस गया तत्पश्चात आसपास बसे कालोनियों में अपनी जान बचाने के लिए लंगड़ा आते हुए घुस गया। बताते चलें कि कालोनियों में बसे लोगों ने सांभर के दर्द को अपनी आंखों से देखा और उसे नजदीक के जंगलों में घुसते हुए भी देखा अगर समय पर विभाग के द्वारा सांभर का इलाज कराया जाता तो वह बच सकता था क्योंकि सांभर बाघ के चंगुल से बच चुका था और उससे दूर भी निकल चुका था लेकिन विभाग की चुप्पी एवं अनदेखी के कारण पूरी रात कालोनियों के बीच झटपट आता हुआ वह सुंदर जीव अपना प्राण त्याग दिया। इस बाबत पूछे जाने पर वन क्षेत्र पदाधिकारी महेश प्रसाद ने बताया कि बरसात के समय में जंगली जानवरों का आतंक काफी बढ़ जाता है खासकर वे कालोनियों के इर्द-गिर्द ए अपना डेरा डाले रहते हैं इसी दौरान बाघ ने अपनी भूख शांत करने के लिए सांभर पर आक्रमण कर दिया था। उन्होंने बताया कि यह सांभर प्रजाति का जीव है जिसकी रूपरेखा बिल्कुल हिरण से मिलता जुलता है। विभाग के जांच उपरांत यह पता चला कि सांभर नर था और वह लगभग 8 से लेकर 10 साल तक की उम्र का था जिसका शरीर देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा था। वन क्षेत्र पदाधिकारी से पूछे जाने पर कि इसके मृत शरीर को क्या किया जाएगा के जवाब में उन्होंने बताया कि अब इस को गढ़ा खून कर हिला दिया जाएगा क्योंकि इसके लिए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया नहीं है क्योंकि यह प्रत्यक्ष है कि यह जीव बाग के आक्रमण से मारा गया है। बताते चलें कि बाघ ने सांभर के पीछे से आक्रमण कर उस के पिछले हिस्से का दाया पैर बिल्कुल तोड़ दिया था और पिछला ही सा निचोड़ दिया था फिर भी वह अपना जान बचाकर एसबीआई बैंक के पीछे वाले कॉलोनी के जंगल में आकर पूरी रात झटपट आने के बाद अपना दम तोड़ दिया जिससे पूरे कालोनियों सहित विभाग में हड़कंप मच गई। सुबह होने के साथ ही वन कर्मियों सहित वन क्षेत्र पदाधिकारी वनपाल घटनास्थल पर पहुंचकर मीडिया वालों से रूबरू हुए और इसकी जानकारी दी।
कॉलोनी वालों की मानें तो आजकल रात के समय में कालोनियों में भी बाघों का आना-जाना शुरू हो गया है जिसके चलते कालोनियों में रहने वाले लोग रतजगा करने पर विवश हो गए हैं। पूरी रात लोग कालोनियों में आग जलाकर रखते हैं ताकि बाघ के आने की कुछ सूचना उन्हें मिल सके। इसके बारे में जानकारी देते हुए वन क्षेत्र पदाधिकारी महेश प्रसाद ने बताया कि जंगली क्षेत्र होने के कारण जंगल के इर्द-गिर्द बसे हुए कालोनियों में प्रायः जंगली जानवर आ जाया करते हैं इसलिए लोगों से अपील है कि वे अपनी सुरक्षा स्वयं करें क्योंकि बरसात का समय है जीव जंतु कालोनियों की ओर रुख करेंगे ही।


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