21वीं सदी के विकास को ठेंगा दिखाता पिपरहिया खटहा नदी में बांस का बना चचरी पुल।
अश्वनी सिंह /ब्यूरो चीफ /आर सिटी न्यूज़ बेतिया
पश्चिम चम्पारण के योगापट्टी प्रखंड क्षेत्र के पिपरहिया पंचायत स्थित वार्ड संख्या नौ एक ऐसा इलाका है जहां 21वीं सदी तक जनता के हित मे सरकार द्वारा तमाम विकास के ढिंढोरा पीटना खोखले साबित हो रहे हैं ।समुचित विकास इस गांव से कोसों दूर है।खटहा नदी के किनारे बसा इस पिपरहिया गांव के वार्ड संख्या नौ में एक प्राथमिक विद्यालय तो है लेकिन उसे भी आज तक पक्का भवन नसीब नही हो सका।जिसके चलते जान जोखिम में डालकर सभी मौसमों में सैकडों छात्र पेड़ के नीचे अपना जीवन सँवारने के लिये शिक्षा अर्जित करते है।वही इस गांव के सैकड़ो लोगों सहित ढाढ़वा, दुधीअवा, नवलपुर ,लकड़ा सहित आधा दर्जन गावों के हजारों परिवारों का रोजी रोटी यानी जीवकोपार्जन हेतु खेतीं बाड़ी व पालतू पशुओं के लिए चरा का जुगाड़ ग्रामीणों द्वारा चंदे की राशि से स्व निर्मित बांस की चचरी पुल के सहारे ही निर्भर है।प्रत्येक दिन सुबह से देर रात तक तमाम बच्चें, वृद्ध,युवा व महिलाओ का जीवनचक्र इसी चचरी पुल के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ है। स्थानीय ग्रामीण पुल निर्माण की उम्मीद लिए विकास के बाट की ओर टकटकी लगाए बैठे है।लेकिन उन भोले भाले गांव देहात में बसने वाले किसान व मजदूरों के विश्वास व भरोसे को कलयुगी वादों ने छलनी कर रखा है।
अंग्रेजी हुकूमत के तुरन्त बाद होश सम्भालने वाले सतर वर्षीय किसान लक्ष्मीकांत तिवारी ने निराशजनक भाव से बताया कि जब से होश संभाला है हर छोटे-बड़े चुनावों में वोट मांगने आये प्रत्याशियों से यहां के लोगों ने इस चचरी पुल के पास एक पक्की पुल मांगा है।और सभी ने तत्कालीन चुनाव बाद पुल निमार्ण कराने का भरोसा भी दिया है।लेकिन चुनाव जीतने या हारने के बाद उन लोगो ने कभी भी इसका चर्चा नही किया।स्थानीय ग्रामीण विक्रम चौधरी,व्यास चौधरी,बाढ़ू चौधरी,लक्ष्मीकांत तिवारी,सतन राम,जगरानी देवी,माला देवी,बचिया देवी समाजसेवी विट्टू तिवारी सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि दैनिक कार्य हेतु इस चचरी पुल से आने -जाने के क्रम में अभी तक दर्जनों बच्चें व महिलाएं गिर कर चोटिल हो चुके है।यहां के स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए चचरी पुल से निजात पाने के लिए एक पक्की पुल निर्माण कराने का अनुरोध किया।

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