बाढ़ की बहती गंगा में लौरिया चीनी मिल भी जमकर डूबकी लगाई
बाढ़ की बहती गंगा में लौरिया चीनी मिल भी जमकर डूबकी लगाई
फैक्ट्री ने लाखों लीटर टेमा का पानी बहाया।
सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद। तालाब, पोखरा की मछलियों के मरने की आशंका।
बाढ़ के पानी से दुर्गंध आ रहा है।
अश्वनी सिंह /ब्यूरो चीफ /आर सिटी न्यूज़ बेतिया
लौरिया में बाढ़ क्या आई, लौरिया एचपीसीएल चीनी मिल को बाढ़ वरदान साबित हो गया है, और सैकड़ों किसानों को रोने के सिवाय हाथ कुछ लगने वाला नही है। उनकी फसल पूरी तरह से बर्बाद होने की बात लोगों द्वारा कही जा रही है। इस बाढ़ में एचपीसीएल चीनी मिल के प्रबंधनों ने जमकर डूबकी लगाई है। मिल प्रबन्ध ने चोरी चुपके स्टोर किया हुआ लाखों लीटर टेमा का पानी सोमवार को रात में बहा दिया। वह टेमा का पानी सैकड़ों एकड़ जमीन पर लगे फसलों में प्रवेश कर गया है। वहीं अत्यधिक टेमा का पानी छोड़ने से कुछ बाढ़ के पानी के साथ बह रहा है तो हजारों लीटर गंदा पानी खेतों में लगे फसलों को एक दिन में ही मुरझा दिया है। उसके पानी के महक से बदबू आने से राहगीरों को परेशानी अलग हो रही है। यह कई बीमारियों को न्योता भी दे रहा है। वहीं तालाबों और पोखरों में पाली गई मछलियों के बचने की आशा भी नहीं है।
इस बावत चीनी मिल के महाप्रबंधक प्रशांत कुमार सिंह से दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की गई परन्तु उनका मोबाइल नेटवर्क कवरेज से बाहर बता रहा था।
फैक्ट्री ने लाखों लीटर टेमा का पानी बहाया।
सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद। तालाब, पोखरा की मछलियों के मरने की आशंका।
बाढ़ के पानी से दुर्गंध आ रहा है।
अश्वनी सिंह /ब्यूरो चीफ /आर सिटी न्यूज़ बेतिया
लौरिया में बाढ़ क्या आई, लौरिया एचपीसीएल चीनी मिल को बाढ़ वरदान साबित हो गया है, और सैकड़ों किसानों को रोने के सिवाय हाथ कुछ लगने वाला नही है। उनकी फसल पूरी तरह से बर्बाद होने की बात लोगों द्वारा कही जा रही है। इस बाढ़ में एचपीसीएल चीनी मिल के प्रबंधनों ने जमकर डूबकी लगाई है। मिल प्रबन्ध ने चोरी चुपके स्टोर किया हुआ लाखों लीटर टेमा का पानी सोमवार को रात में बहा दिया। वह टेमा का पानी सैकड़ों एकड़ जमीन पर लगे फसलों में प्रवेश कर गया है। वहीं अत्यधिक टेमा का पानी छोड़ने से कुछ बाढ़ के पानी के साथ बह रहा है तो हजारों लीटर गंदा पानी खेतों में लगे फसलों को एक दिन में ही मुरझा दिया है। उसके पानी के महक से बदबू आने से राहगीरों को परेशानी अलग हो रही है। यह कई बीमारियों को न्योता भी दे रहा है। वहीं तालाबों और पोखरों में पाली गई मछलियों के बचने की आशा भी नहीं है।
इस बावत चीनी मिल के महाप्रबंधक प्रशांत कुमार सिंह से दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की गई परन्तु उनका मोबाइल नेटवर्क कवरेज से बाहर बता रहा था।

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